Surendra shriwas
Chhattisgarhiya Sable badhiya News Editor

महासमुंद :- पिथौरा छत्तीसगढ़ के पिथौरा नगर में स्टाम्प पेपर बिक्री को लेकर एक बड़ा भ्रष्टाचार का खेल सामने आया है। शासन द्वारा तय की गई दरों को पूरी तरह नजरअंदाज कर वेंडर खुलेआम मनमानी वसूली कर रहे हैं। आम जनता की मजबूरी का फायदा उठाते हुए न सिर्फ अतिरिक्त पैसे वसूले जा रहे हैं, बल्कि सवाल उठाने वालों को धमकियां दी जा रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा सिलसिला प्रशासन की आंखों के सामने चल रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के अनुसार, 10 रुपये का स्टाम्प पेपर 15 रुपये में, 20 रुपये का 30 रुपये में, 50 रुपये का 60 रुपये में और 100 रुपये का स्टाम्प 120 रुपये तक में बेचा जा रहा है। कई मामलों में तो हजारों रुपये तक अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है। शासकीय दस्तावेज, हलफनामे, रजिस्ट्री और आरटीआई जैसी जरूरी प्रक्रियाओं के लिए स्टाम्प अनिवार्य होने का फायदा उठाकर यह लूट मची हुई है।
महिला पत्रकार पर हमला: स्टिंग ऑपरेशन में खुली पोल
लगातार आ रही शिकायतों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित महिला पत्रकार शिखा दास ने खुद मौके पर पहुंचकर सच्चाई जानने की कोशिश की। उन्होंने आरटीआई आवेदन के लिए मात्र 10 रुपये का स्टाम्प खरीदना चाहा, लेकिन स्टाम्प वेंडर दुष्यंत डड़सेना ने 15 रुपये की मांग कर दी। जब पत्रकार ने अतिरिक्त राशि का कारण पूछा तो वेंडर ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।
वेंडर ने पत्रकारों पर झूठी खबर फैलाने का आरोप लगाते हुए अपमानजनक टिप्पणियां भी कीं। इतना ही नहीं, वेंडर ने यह भी कहा कि जो अतिरिक्त पैसा वसूला जा रहा है, वह “ऊपर तक” पहुंचाया जाता है। यह बयान पूरे मामले को संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
नोटरी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
जानकारी के मुताबिक, आरोपी दुष्यंत डड़सेना नोटरी तुलसीराम डड़सेना का पुत्र है। वह नोटरी कक्ष में ही बैठकर स्टाम्प बेच रहा था। पूरे घटनाक्रम के दौरान नोटरी तुलसीराम डड़सेना वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने पुत्र के कथित अभद्र व्यवहार को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। उनकी चुप्पी ने नोटरी की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्रेकिंग न्यूज के बाद मानहानि की धमकी
जैसे ही यह घटना मीडिया में प्रसारित हुई, संबंधित पक्ष की ओर से एक वरिष्ठ पत्रकार को मानहानि का नोटिस भेजने की धमकी दी गई। पत्रकार समुदाय इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
पीड़ित पत्रकार ने प्रशासन से की शिकायत
शिखा दास ने इस पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत पिथौरा के एसडीएम और तहसीलदार को सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी वेंडर का लाइसेंस तुरंत निरस्त किया जाए, पूरे नेटवर्क की गहन जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन पर उठे सवाल, अब परीक्षा की घड़ी
पिथौरा नगर में लंबे समय से चल रही इस अवैध वसूली ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं थी या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं?
अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो “स्टाम्प माफिया” का यह खेल आम जनता का शोषण जारी रखेगा। पिथौरा के ग्रामीण अब न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन इस मामले में न सिर्फ तेजी दिखाएगा, बल्कि पूरे भ्रष्ट तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकेगा।
यह मामला केवल एक स्टाम्प वेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में बैठे भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी निष्पक्षता और सख्ती से कार्रवाई करता है।







