बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड : अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा, हाईकोर्ट का फैसला पर्याप्त सबूत किसी आरोपी से भेदभाव नहीं हो सकता

एनसीपी नेता स्वर्गीय राम अवतार जग्गी हत्याकांड में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच का बड़ा फैसला आया है निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने हत्याकांड की प्रमुख आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है आजीवन कारावास के साथ ही ₹1 हजार रुपए जुर्माना भी किया गया है जुर्माने की राशि नहीं पटाने पर 6 महीने अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा दी गई है। डिवीजन बेंच ने सतीश जग्गी की याचिका को खारिज कर दिया है 78 पेज में डिवीजन बैच का यह  फैसला आया है।

डिवीजन बेचने अपने फैसले में कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हो तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हें सबूत के आधार पर दो सीठराना सही नहीं है जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित ना हो जाए हाई कोर्ट चीफ जस्टिस रमेश सिंह और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन भेजना आज या फैसला सुनाया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को आईपीसी की धारा 302 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्र कैद और ₹1000 जुर्माना की सजा दी गई है।

बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड

4 जून 2003 को रायपुर में ( NCP ) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें ब्ल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत में संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, वहीं एनसीपी नेता रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में रोक लग गई थी, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया था जहां केस फिर रिओपन होने के बाद हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद यह बड़ा फैसला आया है।

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