राजमहल सरायपाली में शाही परंपरा के साथ मनाया गया दशहरा, राजा देवेंद्र बहादुर सिंह ने किया शस्त्र पूजन

सरायपाली :- अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय के प्रतीक विजयादशमी पर्व पर राजमहल किला सरायपाली में पारंपरिक राजशाही दशहरा हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। राजमाता पीली बाई एवं फुलझर स्टेट के राजा देवेंद्र बहादुर सिंह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस ऐतिहासिक परंपरा से जुड़े आयोजन में शस्त्र पूजन, विजय यात्रा, रावण प्रतीक दहन, राजतिलक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ नागरिकों, मातृशक्ति एवं युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

शस्त्र पूजन के बाद निकली भव्य विजय यात्रा

विजयादशमी के अवसर पर राजमहल में विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया गया। इसके पश्चात ढोल-नगाड़ों, डीजे और कर्मा दल के मधुर संगीत एवं नृत्य के बीच राजा देवेंद्र बहादुर सिंह की विजय यात्रा निकाली गई। राजमहल से प्रारंभ हुई यह यात्रा जयस्तंभ चौक होते हुए पुरानी मंडी पहुंची। नगर में जगह-जगह विजय यात्रा का स्वागत किया गया। पारंपरिक राजसी वेशभूषा, उत्साह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

पुरानी मंडी में राजपुरोहित पंडित प्रदीप दास ने राजा देवेंद्र बहादुर सिंह से किले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इसके पश्चात रावण के प्रतीक स्वरूप केले के पेड़ को तलवार से काटने की परंपरा निभाई गई तथा रावण के विशाल पुतले का दहन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से उपस्थित लोगों को बुराई और असत्य का मार्ग त्यागकर सत्य, धर्म एवं सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।

राजपरिवार का विधि-विधान से हुआ राजतिलक

विजय यात्रा एवं पारंपरिक रस्मों के पश्चात राजमहल में सभा का आयोजन किया गया। यहां राजपुरोहित पंडित प्रदीप दास ने फुलझर स्टेट के राजा देवेंद्र बहादुर सिंह सहित कुमार नीलेंद्र बहादुर सिंह, कुमार योगेंद्र बहादुर सिंह एवं कुमार वरुणेंद्र बहादुर सिंह का विधि-विधान से राजतिलक किया।

इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने राजा देवेंद्र बहादुर सिंह तथा राजपरिवार का स्वागत एवं अभिनंदन किया। आयोजन के दौरान राजपरिवार ने मंदिर, गुरुद्वारा एवं मस्जिद में दर्शन किए तथा नगर के नागरिकों से भेंट-मुलाकात कर विजयादशमी की शुभकामनाएं साझा कीं। इस पहल ने सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

दस विकारों पर विजय का पर्व है दशहरा : राजा देवेंद्र बहादुर सिंह

सभा को संबोधित करते हुए फुलझर स्टेट के राजा देवेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि दशहरे का ऐतिहासिक संदेश केवल प्राचीन युद्धों की स्मृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक युग में मनुष्य को अपने भीतर के दस विकारों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।

उन्होंने सभी के जीवन में शांति, खुशी, समृद्धि, सफलता और आनंद की कामना करते हुए विजयादशमी की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। दशहरा पर्व काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा एवं चोरी जैसी बुराइयों का त्याग कर सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है।

वीरता, शौर्य और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक

दशहरा भारतीय संस्कृति में वीरता, शौर्य और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। रामायण में भगवान श्रीराम की रावण पर विजय, शक्ति पूजा की परंपरा, महाभारत में पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी शमी वृक्ष की पूजा तथा ऐतिहासिक काल में राजाओं की विजय यात्राएं इस पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती हैं। प्राचीन काल में राजा-महाराजा विजय की कामना के साथ इसी दिन रण यात्रा पर प्रस्थान करते थे। राजमहल सरायपाली में आयोजित पारंपरिक राजशाही दशहरा इसी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का प्रयास है।

कर्मा नृत्य, नाटक और मया के संदेश ने मोहा मन

राजमहल परिसर में दशहरा पर्व के अवसर पर विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए थे, जहां लोगों की अच्छी चहल-पहल रही। कर्मा दल की प्रस्तुति तथा कोल्दा-खल्लारी की नाचा पार्टी द्वारा प्रस्तुत नाटक एवं ‘मया के संदेश’ कार्यक्रम ने दर्शकों का मन मोह लिया। पारंपरिक लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन में उत्सव का रंग भर दिया।

जनप्रतिनिधियों एवं समाजजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में विधायक श्रीमती चातुरी नंद सहित समाज के पदाधिकारियों में यज्ञराम सिदार, विजय कौशिक, सत्यभामा नाग, करमसिंह पालेश्वर, पांडव नाग, शिव शोभन ठाकुर, परमानंद नागेश, गणेश सिदार, कुंजल सिदार, ललित दीवान, शिव अत्री, मंगतराम पालेश्वर, चंद्रशेखर जगत, गोरेलाल सिदार, श्यामचरण सिदार, सफेद बाघ, कमलदेव नाग, चंद्रहास नाग, बुढ़ान सिंह सिदार, नेपाल सिंह सिदार, चंदरसाय सिदार, चुम्मनलाल पुहुप, सुशील कुमार दीवान, अरुण कुमार जगत, छबिलाल बाघ, गोविंद सिदार, बनऊ राम दीवान, समूल नाग, गुलाब सिंह पालेश्वर, प्रीतम सिंह पालेश्वर, सुखीराम बरिहा सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।

इसी प्रकार जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में विजय साहू, हिमसागर पटेल, कमल किशोर अग्रवाल, रविशंकर नायक, महेंद्र कुमार नायक, घुरऊ नायक, राजेंद्र यादव, राजेंद्र गुप्ता, कमलेश अग्रवाल, किशोर नायक, दिनेश भोई, महेंद्र पटेल, मनभजन पटेल, बबलू आहूजा एवं परमानंद पटेल सहित समाज के प्रबुद्धजनों, मातृशक्ति और युवाप्रभाग के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन पीतांबर बाघ, सचिव अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ सरायपाली ने किया। वहीं आभार प्रदर्शन विजय कौशिक, कोषाध्यक्ष अखिल भारतीय गोंड समाज अठारहगढ़ ने किया। राजमहल सरायपाली में आयोजित पारंपरिक राजशाही दशहरे ने धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत, लोकसंस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए विजयादशमी के महत्व को पुनः रेखांकित किया।

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