सरायपाली :- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली में रेबीज की रोकथाम एवं बचाव के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रेबीज जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों एवं उपस्थित लोगों को रेबीज बीमारी के कारण, संक्रमण के तरीके, लक्षण, बचाव एवं उपचार के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण साहू ने बताया कि रेबीज एक गंभीर एवं जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित पशु के काटने, खरोंचने अथवा उसकी लार के घाव या शरीर की श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क में आने से फैल सकती है। कुत्ते रेबीज संक्रमण का प्रमुख सोत हैं। उन्होंने कहा कि पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए इसी कड़ी में खंड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी टी आर धृतलहरे ने बैठक में बताया गया कि पशु के काटने अथवा खरोंचने के तुरंत बाद घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा आवश्यकता होने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन दिया जाता है। रेबीज से बचाव के लिए समय पर घाव की सफाई और निर्धारित टीकाकरण पूरा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पशु के काटने के बाद झाड़- फूक या घरेलू उपचार के भरोसे उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए तथा पालतू कुत्तों का नियमित रेबीज टीकाकरण कराने, आवारा एवं संदिग्ध पशुओं से अनावश्यक संपर्क से बचने तथा पशु काटने की घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्वास्य संस्था में उपचार कराने की अपील की गई।स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की कि “रेबीज से डरें नहीं, जागरूक रहें और पशु के काटने पर तुरंत उपचार कराए.।” जागरूकता एवं समय पर चिकित्सा उपचार के माध्यम से रेबीज से होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है।उक्त कार्यक्रम में समस्त सुपरवाइजर आर एन दुबे, मोहम्मद कादिर , संकीर्तन बुड़ेक, डोलामणी भोई , सुरेश पटेल , भरत नायक, अखिल प्रधान एवं एलएचवी में आर गार्डिया, एम हाविल, बृंदा चौहान,निर्मला नागेश, डी फ्रांसिस सम्मिलित रहे ।







