सरायपालीः – एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कल ही सभी जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्यवाही की जाए, किसी को बख्शा न जाए। तो दूसरी तरफ नगरपालिका सरायपाली सीएम के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अपनी गर्दन बचाने और CM हेल्पलाइन की शिकायत को दबाने में जुटी हुई है।
मामला CM हेल्पलाइन 1076 के टोकन नं. WPS260900207 582 का है, जिसमें सरायपाली नगरपालिका में पिछले कुछ समय में हुई करोडों के सौंदर्यीकरण कार्य मे भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। जांच के बजाय नगरपालिका ने संयुक्त संचालक रायपुर को पत्र क्रमांक 402 दिनांक 16.10.2026 भेजकर गोलमोल जवाब दे दिया और टोकन बंद करने की सिफारिश कर दी।

CM साय के आदेश के बाद भी लीपापोती :
मुख्यमंत्री के कठोर कार्यवाही के निर्देश के बाद भी नगरपालिका के जवाब में जिम्मेदारी लेने के बजाय बहानेबाजी है:
सड़क की दरारों पर – लिख दिया कि “सड़क पैदल चलने के लिए थी, कृषि वाहन चलने से दरार आई।” सवाल है कि लाखों की CC रोड क्या सिर्फ पैदल चलने के लिए बनती है?
गार्डन जंगल पर – “बारिश के कारण सफाई प्रभावित हुईं” – जबकि कुछ सालो से ही गार्डन में झाड़ियां उगी हैं, पौधे सूख चुके हैं। केवल खानापूर्ति की गई है!
सूचना बोर्ड पर – “6 माह हो गए इसलिए बोर्ड की जरूरत नहीं, अज्ञात लोगों ने हटा दिया” – बिना सूचना बोर्ड के भुगतान कैसे हुआ, इसका जवाब नहीं।
ठेकेदार को बचाने में पूरा जोर – घटिया काम के बाद भी उसी ठेकेदार को करोड़ों के काम देने पर कहा गया कि “सब नियमानुसार निविदा से हुआ है।”

सीधे CM आदेश की अवहेलना-
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कल ही मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि भ्रषटाचार पर जीरो टॉलरेंस है और कठोर कार्यवाही करो, तो उसी के दूसरे दिन नगरपालिका द्वारा इस तरह शिकायत को विलोपित कराने का प्रतिवेदन भेजना सीधे मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना है।
नगरवासियों विपक्ष ने अब मांग की है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस पत्र को संज्ञान में लेकर सरायपाली नगरपालिका में हुए शिव मंदिर, पदमपुर मार्ग और बड़ा तालाब सौंदर्यीकरण के सभी कार्यों की स्वतंत्र जांच कराए और संबंधित अधिकारियों सहित संबंधित ठेकेदार पर कठोर कार्यवाही करे, ताकि CM साय की मंशा के अनुरूप भ्रष्टाचारियों में संदेश जाए।








